सोचो क्या दुनिया हैं सरहद के उस पार …
एक ही सूर्य एक ही चाँद …
एक ही माटी , एक ही इंसान ..
कागज़ के चंद टूकडो ने दिया इंसानियत को एक प्रहार …
क्या काम आये किसी के यह खून भरे उपहार
क्या किया था उस माँ की कोख ने तेरा
जो पसंद नहीं तुमको उनका वह चेहरा
बनाई थी खुदा ने धरती सी एक तस्वीर
खींचता क्यों इंसान उस पे खून के यह लकीर
छोड़ चलो खेलना यूँ खून से होली..
आगे बढ़ते हैं करके बात और बोली
एक थे हम एक हैं आज.. लेकर चलो यही आवाज
संग चलो साथ रहो सफर में लेकर प्रेम का जहाज