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Kavita !

सोचो क्या दुनिया हैं सरहद के उस पार …
एक ही सूर्य एक ही चाँद …
एक ही माटी , एक ही इंसान ..
कागज़ के चंद टूकडो ने दिया इंसानियत को एक प्रहार …
क्या काम आये किसी के यह खून भरे उपहार

क्या किया था उस माँ की कोख ने तेरा
जो पसंद नहीं तुमको उनका वह चेहरा
बनाई थी खुदा ने धरती सी एक तस्वीर
खींचता क्यों इंसान उस पे खून के यह लकीर

छोड़ चलो खेलना यूँ खून से होली..
आगे बढ़ते हैं करके बात और बोली
एक थे हम एक हैं आज.. लेकर चलो यही आवाज
संग चलो साथ रहो सफर में लेकर प्रेम का जहाज

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Ek Akeli Shaam

तुझे नहीं पता की मैं कौन हूँ
कभी दीखता आशिक़ कभी दिकथा मदहोश हूँ
ना कर उम्मीद पता करने की मैं कौन हूँ
कभी पवन का एक झोंका हूँ
जो उड़ते संग ले जाता हूँ बहार को
संग ले चलू दर्द और तन्हाई को
ना बहार रोक पाई थी हमे ना बादल रोक पाएंगे ….
ये हवा हैं जिसको कोई ना बाँध पाया हैं
मंन और सोच को भी ना कोई रोख पाया हैं
वह सब संग ले आते हैं और सब ले जाते हैं
दर्द हो या मुस्कान साथ में कभी ख़ुशी और आँसू
और एक लम्हा छोड़ जाते हैं …
एक अकेली शाम सोचता हूँ यूँही…

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Phir Se Ud Chalaa

  • Khamoshi si bari raat jalaa nahi koi chiraag…
  • jub man hon rukhaaa aur sahan na ho tanhaayi…
  • jee kartha hain ki chod du sab kuch ek baar…
  • nahi soch kuch jab man me hain li taan…
  • pade hain aage tere kayi gulistaaan…
  • na is jahaan na us jahaan.. Bus soch manzil hain kahaan.
  • main na thakoonga rukhunghaaa ya chodungaaa koi pathar uspaar…
  • do din ki zindagi kya jee ghosle me baitey paigaaam…
  • jaaaa ud chal apne phailaaye bahu pankh samaaan..
  • aasman apna… apna the jahaan…thak mat ruk mat jhuk mat….
  • agneeepath agneeepath agneepath